भारत का सबसे प्रसिद्ध होली मनाने वाला राज्य: उत्तर प्रदेश
होली, रंगों और उमंगों का त्योहार, भारत के सभी राज्यों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश में इसका उत्सव एक अलग ही रंग में नजर आता है। यह राज्य होली के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक है, जहां इसकी धूम देखने लायक होती है। खासकर ब्रजभूमि (मथुरा-वृंदावन), कान्हा की नगरी (नंदगांव-बरसाना), काशी और अवध में होली का जश्न अद्वितीय होता है।
1. ब्रज की होली – प्रेम और भक्ति का संगम
होली के सबसे भव्य और मनमोहक रूपों में से एक ब्रज क्षेत्र (मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव, गोकुल) में देखने को मिलता है। यहां की होली पूरे भारत में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक आते हैं।
(क) बरसाना की लट्ठमार होली
बरसाना, राधा रानी की जन्मभूमि, अपने अनूठे होली उत्सव के लिए मशहूर है। यहाँ महिलाएं, पुरुषों को लाठियों से मारती हैं और पुरुष बचने का प्रयास करते हैं। इस परंपरा को "लट्ठमार होली" कहते हैं। यह आयोजन होली से कुछ दिन पहले होता है और इसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है।
(ख) नंदगांव की होली
बरसाना की होली के अगले दिन नंदगांव (कृष्ण की नगरी) में होली खेली जाती है। यहाँ के पुरुष, बरसाना की महिलाओं पर रंग डालते हैं और होली का आनंद लेते हैं।
(ग) फूलों की होली (वृंदावन)
बांके बिहारी मंदिर (वृंदावन) में फाल्गुन माह की एकादशी को फूलों से होली खेली जाती है। इसमें गुलाल और रंगों की जगह केवल फूलों की वर्षा होती है। यह नजारा बेहद सुंदर और भक्ति से परिपूर्ण होता है।
(घ) रंगभरनी एकादशी (बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन)
इस दिन भगवान बांके बिहारी को अबीर-गुलाल अर्पित किया जाता है और भक्तों के साथ होली खेली जाती है। इसे देखकर भक्तगण मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
2. काशी की होली – शिव की नगरी में रंगों की मस्ती
वाराणसी (काशी) में होली का अलग ही अंदाज होता है। यहाँ "मसान की होली" प्रसिद्ध है, जिसे "शिव की होली" भी कहते हैं। इस अनूठे आयोजन में लोग चिता भस्म और रंगों के साथ होली खेलते हैं, जिससे यह संदेश दिया जाता है कि जीवन और मृत्यु एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
इस अनूठी होली को देखने और खेलने के लिए काशी में देश-विदेश से लोग जुटते हैं। गंगा घाटों पर भांग, ठंडाई और गुझिया का आनंद लेते हुए भक्तगण मस्ती में झूमते हैं।
3. अवध (लखनऊ, अयोध्या) की होली – नवाबी और रामभक्ति का संगम
अयोध्या, भगवान राम की जन्मभूमि, होली के अवसर पर धार्मिक भक्ति और उत्साह से भर जाती है। यहाँ के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और श्रद्धालु श्रीराम और हनुमानजी के साथ रंगों की होली खेलते हैं।
लखनऊ में होली नवाबी अंदाज में मनाई जाती है। यहाँ होली के अवसर पर विशेष "होली मिलन समारोह" आयोजित किए जाते हैं, जिसमें कवि सम्मेलन, नृत्य, संगीत और गुझिया-ठंडाई की दावत होती है।
4. कानपुर और इलाहाबाद (प्रयागराज) की होली
कानपुर की होली में "गंगा मेला" का विशेष महत्व है। यह होली के पांच दिन बाद मनाया जाता है और इसमें हजारों लोग भाग लेते हैं। इस मेले की शुरुआत 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के समय हुई थी और आज भी इसे पूरी भव्यता के साथ मनाया जाता है।
प्रयागराज में होली के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। संगम तट पर भक्तगण रंगों के साथ होली खेलने के बाद डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करते हैं।
5. गोरखपुर और पूर्वांचल की होली – भक्ति, भांग और भोज का अनूठा संगम
पूर्वांचल में होली के दिन विशेष रूप से पारंपरिक लोकगीत गाए जाते हैं। गोरखनाथ मंदिर में भक्तों के साथ होली खेली जाती है। भांग और ठंडाई की मस्ती यहाँ की होली को और खास बना देती है।
गोरखपुर में "दंगल होली" भी लोकप्रिय है, जिसमें लोग कुश्ती कर होली मनाते हैं।
उत्तर प्रदेश में होली का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
उत्तर प्रदेश में होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि संस्कृति और आस्था का उत्सव है। श्रीकृष्ण और राधा की प्रेम लीला को समर्पित यह पर्व पूरे राज्य में धूमधाम से मनाया जाता है।
- भक्ति और प्रेम: ब्रज में होली का सीधा संबंध राधा-कृष्ण की प्रेम कथा से है।
- सामाजिक एकता: इस अवसर पर सभी जाति, धर्म और वर्ग के लोग एक साथ मिलकर होली मनाते हैं।
- संगीत और नृत्य: फगुआ, चौताल, रसिया और लोकगीतों से माहौल संगीतमय हो जाता है।
- विशेष पकवान: गुझिया, मालपुआ, ठंडाई और भांग की मिठास होली को और भी रंगीन बना देती है।
Post a Comment